राजस्थान सरकार ने राज्य के पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के फॉर्म वर्ष 2026 के लिए शुरू कर दिए हैं। यह योजना पहले वित्तीय वर्ष 2024-25 में लॉन्च की गई थी और अब 2025-26 के बजट में इसका दायरा और बड़ा कर दिया गया है। सरकार ने घोषणा की है कि इस योजना के तहत कुल 42 लाख पशुओं का बीमा किया जाएगा, जिसमें 21 लाख पशु पिछले वित्तीय वर्ष के शामिल होंगे। बढ़ी हुई संख्या में अब 10-10 लाख गाय, भैंस, भेड़ और बकरियाँ तथा 2 लाख ऊँट योजना के दायरे में लाए गए हैं। इस विस्तार का सीधा लाभ उन लाखों परिवारों को मिलेगा जो पशुपालन पर निर्भर हैं।
योजना का उद्देश्य और मिलने वाले लाभ
मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के पशुपालकों को उनके पशुधन की आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में आर्थिक नुकसान से बचाना है। राजस्थान के ग्रामीण परिवार अक्सर अपने पशुओं पर निर्भर रहते हैं और एक ही पशु की मृत्यु उनके आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इस योजना के माध्यम से सरकार गाय, भैंस, भेड़, बकरी और ऊँट जैसे पशुओं का नि:शुल्क बीमा कर रही है, जिससे किसी भी प्रकार की अनहोनी पर परिवार को मजबूत वित्तीय सहायता मिल सके। यह कदम न केवल पशुपालन को बढ़ावा देता है बल्कि पशुपालक परिवारों को सामाजिक और आर्थिक मजबूती भी प्रदान करता है।
कौन ले सकता है योजना का लाभ
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए यह योजना केवल जनाधार कार्ड धारक पशुपालकों के लिए उपलब्ध है। पात्र पशुपालक अपने परिवार के अधिकतम 2 दुधारू गाय, 2 दुधारू भैंस, 1-1 गाय-भैंस, 10 बकरियाँ, 10 भेड़ें और 10 ऊँट वंश पशुओं का नि:शुल्क बीमा करवा सकते हैं। यह प्रावधान सीमित आय वाले पशुपालकों के लिए काफी राहत प्रदान करता है, क्योंकि पशु बीमा की सामान्य लागत कई परिवारों के लिए वहन करना मुश्किल होता है। अब सरकार यह सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क दे रही है, जिससे अधिकतम लाभार्थी सामने आ सकें।
पशु मूल्य निर्धारण और बीमा राशि
योजना में पशु की कीमत का निर्धारण एक निश्चित मानक के आधार पर किया जाता है। दुधारू गाय के लिए 3000 रुपये प्रति लीटर प्रतिदिन उत्पादन के आधार पर न्यूनतम कीमत तय की जाती है, जिसकी अधिकतम सीमा 40,000 रुपये है। दुधारू भैंस का मूल्य 4000 रुपये प्रति लीटर प्रतिदिन के आधार पर निर्धारित किया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा भी 40,000 रुपये रखी गई है। भेड़ और बकरी के लिए अधिकतम 4000 रुपये तथा ऊँट के लिए अधिकतम 40,000 रुपये निर्धारित किए गए हैं। किसी भी विवाद या अंतर की स्थिति में पशु चिकित्सक द्वारा किया गया मूल्यांकन ही अंतिम माना जाएगा। यह राशि पशु मालिकों को आकस्मिक मृत्यु पर प्रतिपूर्ति के रूप में मिलेगी।
